"रूपा दीदी का सपना"
बाल प्रेरक कहानी "रूपा दीदी का सपना" (श्रीमती रूपाली वशिष्ठ के जीवन से प्रेरित) कहानी का उद्देश्य बच्चों को यह सिखाना कि "पढ़ाई, कला, मेहनत और संस्कार मिलकर किसी भी सपने को साकार कर सकते हैं।" कहानी बहुत समय पहले की बात है, उत्तराखंड के एक सुंदर शहर देहरादून में एक छोटी सी बच्ची रहती थी – उसका नाम था रूपा। रूपा को किताबें पढ़ना, नृत्य करना, गाना गाना और चित्र बनाना बहुत पसंद था। वह स्कूल में पढ़ाई में भी बहुत होशियार थी। जब उसके दोस्त खेल में लगे रहते, तो वह पहाड़ों की कहानियाँ पढ़ती, पुराने मंदिरों की तस्वीरें बनाती और अपनी माँ से भारत की संस्कृति के बारे में सवाल पूछती। एक दिन उसके शिक्षक ने पूछा, "बच्चो, तुम बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?" किसी ने कहा डॉक्टर, किसी ने पायलट, लेकिन रूपा ने कहा – "मैं इतिहासकार बनना चाहती हूँ!" सब बच्चे हँसने लगे – "इतिहास कौन पढ़ता है! उसमें मज़ा नहीं!" लेकिन रूपा मुस्कराई और बोली – "इतिहास से ही तो हमें पता चलता है कि हमारे पूर्वज कितने महान थे। मैं उन कहानियों को फिर से जिंदा करना चाहती हूँ।...