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Showing posts from September, 2026

वो आँसू जो बह नहीं पाए

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वो आँसू जो बह नहीं पाए “वो बातें जो कह नहीं पाए, वो आँसू जो बह नहीं पाए…” आँखों में नमी लिए शैलेश यह गाना सुन रहा था। पुराने गाने सुनना उसका बहुत पुराना शौक था और यह गीत तो उसके दिल के बेहद करीब था। जब भी यह गीत बजता, वह अक्सर उसका वॉल्यूम बढ़ा देता और आँखों की बरसात के साथ यादों की उस सड़क पर निकल पड़ता, जहाँ हर मोड़ पर अतीत उसका इंतज़ार करता था। यादों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता और दुख शब्द बन जाने का रास्ता नहीं जानते। जिंदगी के खूबसूरत लम्हों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, लेकिन उन्हें महसूस करने के लिए भी कभी-कभी यादों में कैद होना पड़ता है। शायद इसलिए कि यादें हमेशा वहीं ठहर जाती हैं, जहाँ हमसे कोई बिछड़ा था। आज भी भीगते-भीगते शैलेश अपनी जिंदगी के उसी मोड़ पर जा पहुँचा था, जहाँ से कोई आगे बढ़ गया था और कोई पीछे रह गया था। रेडियो पर पुराने गाने सुनना उसका पसंदीदा शौक था। जब भी यह गाना आता, वह वॉल्यूम बढ़ा देता और मिनी आकर कहती— “क्या भैया! जब देखो तब यही गाना…” वह उसे मज़ाकिया अंदाज़ में घूरकर देखता और मिनी हँसती हुई चली जाती। मिनी उससे छह साल छोटी थी। दसवीं में पढ़ती ...

लघु कहानी

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किराएदार कौन? एक लघु कहानी, जो जीवन का बड़ा सत्य कह जाती है।  भूमिका मनुष्य जीवन भर अपने लिए घर बनाता है, संपत्ति जोड़ता है और उसे अपना कहकर गर्व करता है। लेकिन क्या वास्तव में इस संसार में कुछ भी स्थायी रूप से हमारा है? यह कहानी तीन मित्रों की है—हीरा, सोहन और मोहन। तीनों की जीवन-यात्रा हमें धीरे-धीरे यह समझाती है कि घर बदलते रहते हैं, मालिक बदलते रहते हैं, लेकिन अंततः हम सभी इस संसार में किराएदार ही तो हैं। किराएदार कौन? प्रत्येक शहर में मकान बनाना संभव नहीं होता। इसलिए मनुष्य अपनी आवश्यकताओं के अनुसार किराए के मकान में रहने लगता है। कोई छोटा कमरा किराए पर लेता है, तो कोई बड़ा मकान। कोई कुछ दिनों के लिए रहता है, तो कोई वर्षों तक। दुनिया में सभी किराएदार हैं। फर्क केवल इतना है कि किसी का कमरा छोटा है और किसी का बड़ा। गाँव से शहर पढ़ने आने वाले विद्यार्थियों के जीवन में यह बात और भी स्पष्ट दिखाई देती है। छोटे-छोटे कमरों में किराएदार बनकर रहने वाले यही विद्यार्थी आगे चलकर बड़े सपने देखते हैं और कभी-कभी उन्हीं सपनों को साकार भी कर लेते हैं। ऐसी ही कहानी है सोहन, मोहन और हीरा की। जयपु...

जब कान्हा आए - प्रमिला

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जब कान्हा आए भूमिका कभी-कभी इतिहास में कोई घटना केवल घटना नहीं रहती, वह युगों की चेतना बन जाती है। श्रीकृष्ण का जन्म भी ऐसी ही एक घटना है—जिसमें एक ओर अत्याचार से घिरी अंधेरी रात है, तो दूसरी ओर उसी अंधकार को चीरता हुआ दिव्य प्रकाश। मथुरा के कारागार में जन्मे कृष्ण ने केवल देवकी और वसुदेव के जीवन को नहीं बदला; उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को प्रेम, करुणा, साहस, कर्म और धर्म का एक ऐसा मार्ग दिया, जो आज भी मनुष्य के भीतर आशा जगाता है। कृष्ण की कथा का सौंदर्य इस बात में है कि उसमें ईश्वर का विराट स्वरूप भी है और एक नन्हे बालक की निश्छल मुस्कान भी। वे देवकी के लिए दिव्य अवतार हैं, यशोदा के लिए लाल हैं, ग्वाल-बालों के लिए सखा हैं, गोपियों के लिए प्रेम की अनुभूति हैं और अर्जुन के लिए जीवन के गहनतम सत्य का उद्घोष करने वाले सारथी। शायद इसी कारण कृष्ण किसी एक रूप, एक संबंध या एक युग में सीमित नहीं होते। ‘जब कान्हा आए’ उसी अनुभूति की कहानी है—उस रात की, जब अंधकार के बीच प्रकाश ने जन्म लिया; उस क्षण की, जब भय के बीच विश्वास ने जन्म लिया; और उस यात्रा की, जिसमें एक नन्हा बालक मथुरा से गोकुल पहुँचा औ...