वो आँसू जो बह नहीं पाए
वो आँसू जो बह नहीं पाए “वो बातें जो कह नहीं पाए, वो आँसू जो बह नहीं पाए…” आँखों में नमी लिए शैलेश यह गाना सुन रहा था। पुराने गाने सुनना उसका बहुत पुराना शौक था और यह गीत तो उसके दिल के बेहद करीब था। जब भी यह गीत बजता, वह अक्सर उसका वॉल्यूम बढ़ा देता और आँखों की बरसात के साथ यादों की उस सड़क पर निकल पड़ता, जहाँ हर मोड़ पर अतीत उसका इंतज़ार करता था। यादों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता और दुख शब्द बन जाने का रास्ता नहीं जानते। जिंदगी के खूबसूरत लम्हों को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं, लेकिन उन्हें महसूस करने के लिए भी कभी-कभी यादों में कैद होना पड़ता है। शायद इसलिए कि यादें हमेशा वहीं ठहर जाती हैं, जहाँ हमसे कोई बिछड़ा था। आज भी भीगते-भीगते शैलेश अपनी जिंदगी के उसी मोड़ पर जा पहुँचा था, जहाँ से कोई आगे बढ़ गया था और कोई पीछे रह गया था। रेडियो पर पुराने गाने सुनना उसका पसंदीदा शौक था। जब भी यह गाना आता, वह वॉल्यूम बढ़ा देता और मिनी आकर कहती— “क्या भैया! जब देखो तब यही गाना…” वह उसे मज़ाकिया अंदाज़ में घूरकर देखता और मिनी हँसती हुई चली जाती। मिनी उससे छह साल छोटी थी। दसवीं में पढ़ती ...