इंसान की असल पहचान
इंसान की असल पहचान क्या इंसान की पहचान उसके कपड़ों से होती है? क्या साधारण सी धोती, फीका पड़ा कुर्ता और घिसी हुई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति समाज की बड़ी ताकत का हिस्सा नहीं हो सकता? हमारे चारों ओर फैली चमक-दमक, ऊंचे ब्रांड्स, और दिखावे की दुनिया बार-बार यही भ्रम पैदा करती है कि इंसान की हैसियत उसकी वेशभूषा से तय होती है। लेकिन इतिहास और वर्तमान बार-बार इस भ्रम को तोड़ते हैं। ऐसी ही एक सच्ची घटना दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घटी, जिसने साबित कर दिया कि असली पहचान इंसान के कपड़ों में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, कर्म और सादगी में होती है। सांसारिक चमक और एक साधारण बुजुर्ग दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा—एक ऐसी जगह जहां हर पल उड़ानें भरती हैं, नई मंज़िलें तय होती हैं और भीड़ हमेशा भागती-दौड़ती नज़र आती है। यहां इंसान की क़ीमत अक्सर उसके कपड़ों, सामान और अंग्रेज़ी बोलने की शैली से आंकी जाती है। इस भीड़ में जब 75 वर्षीय बुजुर्ग शंकर नारायण जी अपनी साधारण खादी की धोती, फीका पड़ चुका सफेद कुर्ता, कंधे पर पुराना झोला और हाथ में लकड़ी की छड़ी लेकर पहुंचे, तो वे इस चमकदार वाता...