Posts

Showing posts from August, 2025

इंसान की असल पहचान

Image
इंसान की असल पहचान क्या इंसान की पहचान उसके कपड़ों से होती है? क्या साधारण सी धोती, फीका पड़ा कुर्ता और घिसी हुई चप्पल पहनने वाला व्यक्ति समाज की बड़ी ताकत का हिस्सा नहीं हो सकता? हमारे चारों ओर फैली चमक-दमक, ऊंचे ब्रांड्स, और दिखावे की दुनिया बार-बार यही भ्रम पैदा करती है कि इंसान की हैसियत उसकी वेशभूषा से तय होती है। लेकिन इतिहास और वर्तमान बार-बार इस भ्रम को तोड़ते हैं। ऐसी ही एक सच्ची घटना दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घटी, जिसने साबित कर दिया कि असली पहचान इंसान के कपड़ों में नहीं, बल्कि उसके चरित्र, कर्म और सादगी में होती है। सांसारिक चमक और एक साधारण बुजुर्ग दिल्ली का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा—एक ऐसी जगह जहां हर पल उड़ानें भरती हैं, नई मंज़िलें तय होती हैं और भीड़ हमेशा भागती-दौड़ती नज़र आती है। यहां इंसान की क़ीमत अक्सर उसके कपड़ों, सामान और अंग्रेज़ी बोलने की शैली से आंकी जाती है। इस भीड़ में जब 75 वर्षीय बुजुर्ग शंकर नारायण जी अपनी साधारण खादी की धोती, फीका पड़ चुका सफेद कुर्ता, कंधे पर पुराना झोला और हाथ में लकड़ी की छड़ी लेकर पहुंचे, तो वे इस चमकदार वाता...

शिक्षा और संस्कार ही सूबे सिंह जी की सबसे बड़ी पूँजी

Image
प्रस्तावना शिक्षक सूबे सिंह जी ने शिक्षा और संस्कारों को अपनी सबसे बड़ी पूँजी बनाया है। उनके सान्निध्य में पले-बढ़े विद्यार्थियों ने यह सिद्ध किया है कि सच्ची शिक्षा जीवन को दिशा देती है और आत्मबल का निर्माण करती है। उनके शिष्य आज शिक्षा, पुलिस, सेना, बी.एस.एफ. और आई.टी. जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्ट सेवाएँ दे रहे हैं, जो उनके शिक्षण कौशल और जीवन मूल्यों की जीवंत झलक है। सूबे सिंह जी की शिक्षण यात्रा केवल किताबों तक सीमित न रहकर चरित्र, अनुशासन और समाज निर्माण की संपूर्ण दृष्टि से परिपूर्ण रही है। प्रस्तुत साक्षात्कार इसी दृष्टि को उजागर करता है, जिसमें उनके विचार, अनुभव और शिक्षा विभाग में व्याप्त कुरीतियों पर उनके स्पष्ट सुझाव शामिल हैं। ✦ सूबे सिंह जी पर संवादात्मक                 साक्षात्कार ✦ बातचीत प्रश्न 1: सूबे सिंह जी, आपके शिक्षण का मूल आधार क्या रहा? उत्तर : मैंने हमेशा शिक्षा को केवल रोजगार पाने का साधन नहीं, बल्कि जीवन निर्माण का मार्ग माना। शायद इसी का परिणाम है कि मेरे सान्निध्य में जितेन्द्र सिंह गुर्जर आज आई.टी. इंजी...