चंदू के जीजू
चंदू के जीजू रिश्तों में थोड़ी शरारत हो तो अपनापन और भी गहरा हो जाता है... भूमिका कभी-कभी जीवन की सबसे खूबसूरत शामें किसी बड़े आयोजन से नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए कुछ साधारण-से पलों से बनती हैं। और जब ऐसे पलों में कोई शरारती साला शामिल हो जाए, तो जीजा की शाम कब हँसी-मज़ाक, उलझन और परेशानी में बदल जाए—कहना मुश्किल है। जीतू भी उस दिन परिवार के साथ कुछ सुखद पल बिताने निकला था। उसे क्या पता था कि एक फ़ेसबुक पोस्ट उसकी शाम का नक्शा बदल देगी और रात को आने वाला सपना अगली सुबह एक मज़ेदार हकीकत का संकेत बन जाएगा! तो आइए, पढ़ते हैं जीजा-साले के रिश्ते की नोकझोंक, अपनापन और हास्य से भरी कहानी— ‘चंदू के जीजू’। कहानी शाम के छह बज रहे थे। जीतू के दफ़्तर से घर लौटने का समय हो गया था। घर पर उसकी पत्नी सोनाली और बेटा पिंकू पहले से ही नए कपड़े पहनकर तैयार बैठे थे। आज कई दिनों बाद पूरा परिवार साथ में कहीं घूमने जाने वाला था। जीतू ने घर की घंटी बजाई। सोनाली ने दरवाज़ा खोला। सोनाली को देखते ही जीतू के चेहरे पर मुस्कान आ गई। “क्या बात है, भाग्यवान! आज तो बड़ी सुंदर लग रही हो।” सोनाली कुछ कहती, उससे पहल...