भीनी भीनी सुगंध का आभास कराती कहानी
नयी पीढ़ी को समझ की मिठास देना भी ज़रूरी अक्सर हम यह मान लेते हैं कि बच्चों को केवल उपहार देना, उन्हें खुश कर देना या उनकी हर इच्छा पूरी कर देना ही उनका पालन-पोषण है। परन्तु सच्चाई यह है कि बच्चों को जीवन की छोटी-छोटी सीखें देना ही उनके व्यक्तित्व के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। जब सही समय पर सही उदाहरण देकर समझाया जाता है, तब वही सीख उनके भीतर स्थायी संस्कार के रूप में बस जाती है। ऐसा ही एक छोटा-सा किन्तु बहुत अर्थपूर्ण प्रसंग आठ वर्ष की बालिका कुक्कू से जुड़ा है। महिला दिवस के अवसर पर वह अपनी दादी और अपनी मम्मा के लिए कुछ विशेष देना चाहती थी। उसके मन में सबसे पहले पुष्पगुच्छ देने का विचार आया। बच्चों के मन में स्वाभाविक रूप से यही छवि होती है कि फूल देना सम्मान और प्रेम का प्रतीक है, इसलिए वह उसी पर अड़ गई। तभी उसके दादा ने उसे बड़े सरल शब्दों में समझाया— “पुष्पगुच्छ का विक्रय वेस्टेज ऑफ मनी ही है। यदि पुष्पगुच्छ देना ही है तो उसे स्वयं तैयार करो, न कि खरीदे हुए। जब तुम खुद खेत, बगीचे या घर की गमलों की पंखुड़ियों और ताज़े फूलों से एक गुलदस्ता बनाओगी, तो तुम्हार...