बाबा जी का सपना

बाबा जी का सपना

भूमिका

नीचे कहानी रूप में प्रस्तुत एक वास्तविक दृढ़निश्चय का विवरण है। सीधीसादी ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं का अपने बाबा जी का सपना पूरा करने का संकल्प।

बाबा जी का सपना

बहुत समय पहले, उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक छोटा-सा गांव था — मीरपुर। इस गांव में एक बड़े और प्यारे परिवार के मुखिया थे श्री दल सिंह जी। वे बड़े ही समझदार और सोच-समझकर काम करने वाले इंसान थे। उन्होंने अपने परिवार को तीन जरूरी बातें सिखाईं —

शिक्षा का महत्व, पारिवारिक एकता, और किसी भी काम को ईमानदारी से करना।

उनकी बातें परिवार के हर सदस्य ने दिल से मानीं। धीरे-धीरे सभी ने मेहनत से पढ़ाई की, आपस में मिलजुल कर रहे और अच्छे फैसले लिए। बाबा जी का सपना था कि उनके परिवार से कोई बड़ा अफसर बने, ताकि गांव और देश का नाम रोशन हो।

समय बीतता गया। पीढ़ियाँ बदलती गईं। पर बाबा जी का सपना दिलों में जिंदा रहा।

🧑‍🎓 एक दिन आया हर्ष का नंबर!

हर्ष, बाबा जी की तीसरी पीढ़ी का होशियार और समझदार बच्चा था। बचपन से ही वह कुछ अलग करना चाहता था। जब वह पाँचवीं कक्षा में था, तभी उसने ठान लिया था — "मैं ऐसा काम करूंगा जिससे लोगों की मदद हो सके।"

उसे अपने फूफाजी और जीजाजी से बहुत प्रेरणा मिली, जो सरकारी नौकरी में थे और बहुत ईमानदारी से काम करते थे। हर्ष ने भी दिन-रात मेहनत की और SSC-CGL परीक्षा पास कर ली। अब वह भारत सरकार में एक अधिकारी बन गया है।

हर्ष कहता है,

"मैं जो कुछ भी हूं, उसका श्रेय सबसे पहले अपने बाबा जी को देता हूं। उन्होंने हमेशा कहा करते थे — 'क्या हमारे घर से भी कोई सरकारी नौकरी में जाएगा?' आज मुझे लगता है जैसे मैंने उनका सपना पूरा कर दिया।"

👧 अब बारी थी आंचल की!

आंचल, हर्ष की बहन जैसी, बहुत मेहनती और पढ़ने-लिखने में तेज़ थी। उसने पहले एक अस्पताल में डाइटीशियन का काम किया, लेकिन दिल में कुछ और ही चाह थी — शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम करने की।

उसे भी बाबा जी के शब्द याद आते थे — 

"अध्ययन से बड़ा कोई धन नहीं।"

तो आंचल ने भी खूब पढ़ाई की, M.Ed. किया और फिर UGC-NET परीक्षा 92.85 परसेंटाइल से पास की।

आज आंचल NCERT के ‘दीक्षा प्रोजेक्ट’ में सेवारत है। अब वह देश भर के बच्चों, शिक्षकों और माता-पिता के लिए डिजिटल शिक्षा पर काम कर रही है।

आंचल कहती है,

"मेरी प्रेरणा मेरे दादा-दादी और माता-पिता हैं। मैं शिक्षा में और आगे बढ़कर रिसर्च करना चाहती हूं।"

🌟 कहानी से सीख:

बड़ों की बातें ध्यान से सुनना हमेशा फायदेमंद होता है।

कड़ी मेहनत और सच्चाई से किया गया काम हमेशा रंग लाता है।

सपने बड़े हो सकते हैं, पर उन्हें पूरा करने के लिए धैर्य और मेहनत चाहिए।

अगर परिवार साथ दे, तो कोई भी बच्चा ऊँचाइयों तक जा सकता है।

बच्चों के लिए संदेश:

"तुम चाहे किसी छोटे गांव के क्यों न हो, अगर सपना सच्चा है और मेहनत पूरी, तो मंज़िल ज़रूर मिलेगी।"

सूचना स्रोत

श्री विनोद कुमार व श्री अशोक कुमार

पाठ्य उन्नयन और विस्तार 




प्रस्तुति 



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