कोमल की उड़ान

भूमिका

धन्य हैं डॉ छाया शर्मा जी, जिन्होंने कोमल की सफलता की गाथा सुनते ही कहानी की रचना करने का मन बना लिया। और! कहानी सृजन भी ऐसा कि उसने सभी का मन मोह लिया। आप भी पढ़िये इस सच्ची कहानी को। 

"कोमल की उड़ान"

राजस्थान के एक छोटे से गाँव में जन्मी कोमल ठेकला को कभी बड़े शहरों की रौनक नहीं लुभाती थी। मिट्टी से सने पाँव, खेतों की सोंधी महक और माँ की साड़ी का आँचल- यही उसकी दुनिया थी। लेकिन उसके सपनों की कोई सीमा नहीं थी। जब बाकी बच्चे गुड्डे-गुड़ियों में खोए रहते, कोमल किताबों की दुनिया में रम जाती।

उसके पिता एक किसान परिवार से थे और नर्सिंग ऑफिसर थे जबकि माँ गृहिणी। घर में तीन बेटियाँ थीं और समाज के कई सवाल। लेकिन कोमल के माता-पिता ने कभी कोई पूर्वागृह नहीं रखा। उन्होंने अपनी बेटियों को डॉक्टर, अफसर और इंसान बनने का अधिकार दिया।


कोमल ने नीट (NEET) की तैयारी जयपुर में शुरू की और एक प्रयास में ही परीक्षा को क्रैक किया। गाँव में कोचिंग तो दूर, ठीक से इंटरनेट भी नहीं था। लेकिन उसने हार नहीं मानी। मोबाइल से यूट्यूब वीडियो देखकर, गाइड बुक्स से पढ़कर और देर रात तक दीपक की रौशनी में पढ़ते-पढ़ते उसने सरकारी मेडिकल कॉलेज में एम. बी. बी.एस (MBBS ) में प्रवेश पा लिया। कोमल के परीक्षा परिणाम में कूटरचित प्रयास भी हुआ लेकिन वह खुल भी गया। कोमल के मित्र और उनकी छोटी बहिन उनके सच्चे मददगार थे। 

एम.बी.बी.एस .की पढ़ाई के दौरान, जब वह अस्पताल में मरीजों को देखती, उसे लगता, इलाज तो वह कर रही है, पर समस्या की जड़ें कहीं गहराई में हैं — गरीबी, अशिक्षा, नीतियों की कमी। यही सोच उसे एक नए रास्ते की ओर ले गई- यू. पी. एस. सी.(UPSC) भारतीय प्रशासनिक सेवा।

जब उसने यह फैसला लिया, तो कई लोगों ने कहा — 

"तू डॉक्टर है, वहीं अच्छा कमाएगी, क्यों इस कठिन रास्ते पर जाना?" 

लेकिन कोमल जानती थी, उसकी आत्मा अब मरीजों से नहीं, व्यवस्था से संवाद करना चाहती है।

यू. पी. एस. सी. (UPSC) तप की परीक्षा। कोमल ने अपने निर्णय किसी से भी नहीं छुपाया। यहाँ तक कि गाँव वालों तक से भी नहीं। कोचिंग में जाना संभव नहीं था, लेकिन ऑनलाइन माध्यम उसका सबसे बड़ा साथी बना। दिन रात पढ़ाई, मॉक टेस्ट, नोट्स बनाना, अख़बार पढ़ना और सबसे महत्वपूर्ण- नियम में निरन्तरता ।

वह सदैव  एक ही बात याद रखती,

"सपनों की उड़ान तब ही सफल होती है जब डर का गुरुत्व बल हार जाए।"

उसकी माँ हर सुबह उठकर उसे तुलसी के सामने दीपक दिखाकर कहती — 

"कोमल, तेरी मेहनत रंग लाएगी।"

पिता ने भले ही यू.पी.एस.सी.   ( UPSC) का नाम न सुना हो, लेकिन बेटी की आँखों में विश्वास देखकर उन्होंने कभी उसे रोकना तो दूर, थकने भी नहीं दिया। तीनों बहनों में यह जुनून फैल गया-बड़ी बहन पहले ही डॉक्टर बन चुकी थी, अब छोटी भी प्रेरणा लेकर उसी राह पर थी।

जब. यूपीएससी(UPSC) रिजल्ट आया, और नाम स्क्रीन पर चमका — "डॉ. कोमल ठेकला- आईएएस (IAS)", पूरे गाँव में जैसे दिवाली आ गई हो। जो गाँव लड़कियों को स्कूल भेजने से कतराता था, वहीं अब बच्चियों के नाम कोमल के नाम पर रखे जाने लगे।

कोमल अब युवाओं को यही बताती हैं-

"आपका गाँव छोटा हो सकता है, लेकिन सपने कभी छोटे मत रखना। जब तक आप खुद पर विश्वास रखते हैं और मेहनत से डरते नहीं, तब तक कोई आपको रोक नहीं सकता।"

वह लड़कियों को विशेष रूप से कहती हैं-"हमें दोहरी मेहनत करनी पड़ती है — एक अपने सपनों के लिए और दूसरी, समाज की सोच बदलने के लिए। लेकिन जब दोनों सफल हो जाएं, तो परिवर्तन स्थायी होता है।"

रचनाकार

डाॅ. छाया शर्मा 

अजमेर, राजस्थान

प्रस्तुति


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