डूबना या तैरना - सुनीता मीणा

 डूबना या तैरना

भूमिका

डूबना या तैरना केवल एक बालिका की कहानी नहीं, बल्कि जीवन के उस सत्य को उजागर करने वाली प्रेरक कथा है, जिसमें डर और साहस आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी एक साधारण बालिका सुजाता, अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए एक ऐसे अनुभव से गुजरती है जो उसके जीवन की दिशा बदल देता है।

अक्सर जीवन हमें अचानक ऐसी परिस्थितियों के बीच ला खड़ा करता है, जहाँ डरना या हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ना—दोनों में से एक रास्ता चुनना पड़ता है। यह कहानी हमें बताती है कि भय से भागने के बजाय यदि उसका सामना किया जाए, तो वही डर हमारी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। सुजाता की जिजीविषा, साहस और सीखने की लगन यह संदेश देती है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास से हर चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

यह कथा विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, क्योंकि यह सिखाती है कि जीवन में सफलता केवल अवसरों से नहीं, बल्कि कठिन अनुभवों से सीख लेने की क्षमता से मिलती है। डूबना या तैरना अंततः यही संदेश देती है कि यदि मन में हिम्मत हो, तो डर भी एक दिन कौशल में बदल सकता है।

कहानी

अनूपगढ़ गांव में एक किसान परिवार रहता था । खेती-बाड़ी करके वह अपना जीवन यापन करता था। किसान परिवार में किसान दंपति और उनके तीन बच्चे थे । तीन बच्चों में दो बालक और एक बालिका थी। तीनों बच्चे गांव के सरकारी विद्यालय में पढ़ने जाते हैं और दोनों दंपति अपने खेतों पर काम करते । विद्यालय की छुट्टी होने पर बच्चे भी उनके मां बाबा के कार्यों में हाथ बढ़ाते। बालिका का नाम था सुजाता । सुजाता बारह वर्ष की बालिका है। अपने विद्यालय से आने के बाद वह घर के कामों में हाथ बंटाती, जानवरों को चारा डालना, हैडपम्प से पानी लाना, गोबर उठाना, झाड़ू निकालना आदि । कभी-कभी वह खेतों पर भी रखवाली के लिए चली जाती थी। रविवार के दिन वह जानवरों को चराने के लिए भी ले जाया करती थी। खेतों पर जाते समय अपनी किताबें भी साथ ले जाती जिससे समय पर गृह कार्य पूरा कर सके।

एक दिन की बात है । वह अपने खेत पर गई हुई थी। वहां गांव का बड़ा तालाब था। बारिश का मौसम था। उसी तालाब के पास, नीचे की तरफ एक कुआं था जो पानी से भरा हुआ था। चार पांच फीट ही खाली था। सुजाता को बहुत तेज प्यास लगी थी। उसके पास पानी पीने का कोई साधन नहीं था। वह कुएं के पास गई उसके चाचा भी उनके खेतों की रखवाली हेतु आए थे। उसने चाचा को अपनी प्यास के बारे में बताया। चाचा ने कहा कि मैं तुम्हें मेरा अंगोछा पकड़ कर कुएं में उतार देता हूं। नीचे उतर कर पानी पीकर आ जाना। सुजाता तैयार हो गई । वह चाचा का अंगोछा पड़कर कुएं में उतर गई। जैसे ही वह पानी पीने लगी चाचा ने अपना अंगोछा छोड़ दिया। अब क्या था सुजाता बहुत ज्यादा घबरा गई और डूबने से बचने के लिए हाथ पैर मारने लगी। उसने हिम्मत नहीं हारी। उस समय तो चाचा ने उसे पकड़ कर बाहर निकाल दिया लेकिन सुजाता के लिए एक नया तथा रोमांचकारी अनुभव था। उसके बाद वह तालाब पर गई कई दिनों तक कम गहराई में जाकर तैरने का अभ्यास करने लगी और वह एक दिन ऐसा भी आ गया जब वह कुएं में बिना डरे ऊपर से कूद कूद कर तैराकी करने लगी । उसने अपने डर पर जीत हासिल कर एक नए कौशल का विकास किया ।

सृजक

सुनिता मीणा

उपप्राचार्य एवं

स्थानीय सम्पादिका 

उलझन सुलझन महिला प्रकोष्ठ 

सवाई माधोपुर (राज.)

पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति 









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