शिक्षा की ललक
शिक्षा की ललक
यह कहानी 12 वर्षीय बालिका सोना की है। उसका जन्म एक छोटे से गाँव अमीरपुर में हुआ था। उसके माता-पिता साधारण किसान थे। उस गाँव में शिक्षा का माहौल अधिक नहीं था, विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा को लेकर। अधिकांश बालिकाएँ घर पर रहकर घरेलू कार्यों में अपनी माँ का हाथ बँटातीं, फिर खेतों पर चली जातीं या जानवर चराने निकल जातीं।
सोना की दिनचर्या भी कुछ ऐसी ही थी। वह अपनी माँ के साथ प्रतिदिन खेतों पर जाती या घर पर रहकर घरेलू कार्यों में सहयोग करती।
हालाँकि, सोना में एक बात अन्य लड़कियों से बिल्कुल अलग थी—उसे पढ़ाई में बहुत रुचि थी। कुछ समय बाद सरकार द्वारा साक्षरता अभियान चलाया गया। रिश्ते में उसके चचेरे भाई के पास इसकी योग्यता थी, इसलिए उसे साक्षरता कार्यक्रम के संचालन का कार्य सौंप दिया गया। वह प्रतिदिन शाम को प्रौढ़ महिला-पुरुषों को अक्षर ज्ञान देता था।
जैसे ही सोना को इस बात का पता चला, वह भी शाम को अपने सभी कार्यों से निवृत्त होकर वहाँ पढ़ने जाने लगी। कुछ ही समय में उसने हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित विषयों का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लिया।
सोना के चचेरे भाई ने उसकी पढ़ाई के प्रति रुचि और जिज्ञासा की बात उसके बाबा को बताई। समझाने पर वे सोना को पढ़ाने के लिए राज़ी तो हो गए, लेकिन एक समस्या थी—उसे पढ़ाया कहाँ जाए?
गाँव में सरकारी विद्यालय केवल पाँचवीं कक्षा तक ही था, और सोना की उम्र पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों से अधिक हो चुकी थी। उसे पहली कक्षा में भेजना भी उचित नहीं लग रहा था। काफी सोच-विचार के बाद निर्णय लिया गया कि पास के गाँव में उसकी बुआ रहती हैं। वहाँ एक निजी विद्यालय था, इसलिए सोना को पढ़ने के लिए वहीं भेज दिया गया।
विद्यालय में प्रवेश से पहले शिक्षक ने सोना की एक परीक्षा ली, जिसमें हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित से संबंधित कुछ प्रश्न पूछे गए। सोना ने सभी प्रश्नों के उत्तर बहुत ही सरलता और सहजता से दिए। उसकी बुद्धिमत्ता देखकर शिक्षक आश्चर्यचकित रह गया। परिणामस्वरूप, सोना को सीधे कक्षा चार में प्रवेश दे दिया गया। यह सोना का विद्यालय में पहला दिन था, जब वह कक्षा चार की छात्रा बनी।
इस प्रकार, सोना के लिए शिक्षा की उजियारी राह खुल गई। इसके बाद उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर बार कक्षा में अव्वल आकर उसने अपनी मेहनत और लगन को सिद्ध किया। आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में उसने कई कीर्तिमान स्थापित किए।
सृजक
सुनिता मीना
उपप्राचार्य और स्थानीय सम्पादिका
उलझन सुलझन महिला प्रकोष्ठ
सवाई माधोपुर (राजस्थान)
पाठ्य उन्नयन और विस्तार व प्रस्तुति








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