आत्मविश्वास

आत्मविश्वास

भूमिका

जीवन में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जब सब कुछ होते हुए भी भीतर एक अजीब-सी खालीपन की अनुभूति होने लगती है। मन किसी अनजानी उलझन में घिर जाता है। न किसी से मिलने का मन करता है, न बात करने का, और न ही रोज़मर्रा की गतिविधियों में कोई रुचि रह जाती है। बाहर से सब सामान्य दिखाई देता है, पर भीतर विचारों का एक तूफ़ान चलता रहता है। ऐसी ही मनःस्थिति कभी-कभी युवाओं को हतोत्साह, भ्रम और अकेलेपन की ओर धकेल देती है। अतः आत्मविश्वास को कभी भी डिगने ना दें। और! स्वयं पर भरोसा रखें कि हम होंगे कामयाब। 

कहानी

कलकत्ता शहर का एक सेठ का बेटा राहुल गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने आया। गुरुजी ने उसे कुछ दिन वहाँ के तौर-तरीके नियम सीखने को कहा और नन्दू नाम के लडके को उसके साथ दे दिया। 

                                सांकेतिक चित्र गूगल से साभार

राहुल उसके साथ बातें करते हुए घूमने लगा। उसने नन्दू से उसके शहर का ठिकाना पूछा। नन्दू ने कहा कि उसके पिता यहाँ काम करते हैं और मैं उनके कार्य में हाथ बंटाते हुए यहीं पढ़ता हूँ। राहुल व्यंग से मुस्कुराया एवं बोला तो तुम यहाँ हम जैसे बड़े लोगों की दया से पढ़ते हो, तुम मुझसे दोस्ती करो ये तुम्हारी हैसियत नहीं है। 

राहुल के इस व्यवहार से नन्दू को दु:ख हुआ। वह गुमसुम रहने लगा। गुरु जी ने इस बात को महसूस किया एवं बड़े प्यार से नन्दू से इस बात की जानकारी ली और पुछा क्या तुम्हारा सामाजिक स्तर तुम्हारी शिक्षा के आड़े आ रहा है? 

गुरु उसे साथ लेकर अपने गाँव की तरफ घूमने  निकल पड़े। चारों तरफ प्रकृति के नजारे, कहीं पेड़-पौधे, उन पर बैठे पंछी, चिड़ियों की चहचहाट, नदी में बहता जल, सब कुछ दिखाते हुए अपने गाँव के घर पहुँच कर विश्राम लिया।

                                 सांकेतिक चित्र गूगल से साभार
                                    गुरु शिष्य साथ भ्रमण पर

संध्या काल में गुरुदेव उसे मंदिर लेकर गए तथा वहाँ दीपक प्रज्वलित कर उसे कुछ श्लोक गाने को कहा, मंदिर में आने वाले भक्त उसके गायन से प्रभावित हो उसकी तारीफ करने लगे। दूसरे दिन प्रातः वे दोनों गुरुकुल की ओर लौट पड़े। 

रास्ते में गुरुजी ने उसे समझाते हुए कहा कि बेटा सामाजिक स्तर किसी भी शिक्षा में बाधक नहीं है। अंदर हीन-भावना के प्रवेश को रोक कर आत्मविश्वास जाग्रत रखो। नन्दू को सारी बातें समझ में आ गईं, वह गुरु चरणों में नतमस्तक हो गया ।

सार

आत्मविश्वास की शक्ति व्यक्ति को सफलता की ऊंचाई पर पहुँचाती है। 

 रचनाकार


पाठ्य विस्तार और प्रस्तुति












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