दो बगुले और कछुआ✓

दो बगुले और कछुआ✓

एक तालाब में दो बगुले और एक कछुआ रहते थे। तीनों में बड़ी अच्छी दोस्ती हो गई थी। कुछ दिनों बाद कम वर्षा होने के कारण वह तालाब सूख गया।

बगुले उड़कर दूर जा सकते थे, लेकिन कछुआ कैसे जाए? इस पर बगुले एक लकड़ी की डंडी ले आए और कछुए से बोले, “तुम इस डंडी को बीच में मुँह से पकड़ लो और ध्यान रखना कि जब तक हम तुमको लेकर दूसरी जगह न उतारें, तब तक बोलना नहीं।”

बगुले डंडी को दोनों किनारों से मुँह में दबाकर उड़ लिए। कछुआ भी डंडी को मुँह से दबाए हुए उनके साथ उड़ लिया।

जैसे ही वे एक गाँव के ऊपर से गुजरे, लोग कछुए को चिढ़ाने लगे और बोले, “देखो, कछुआ उड़ रहा है!”

 फिर एक गाँव और रास्ते में आया। वहाँ भी ऐसा ही हुआ। कछुआ अपने ऊपर किए जा रहे मज़ाक से तंग आ गया और उसने जवाब देने के लिए मुँह खोल दिया। वह भूल गया कि लकड़ी तो उसके मुँह की पकड़ से ही उसे बगुलों के साथ उड़ा रही थी।

 मुँह खुलते ही वह आसमान से जमीन पर गिर गया और मर गया।

 शिक्षा

 यह कहानी हमें यही शिक्षा देती है कि दूसरों के उकसावे में मत आइए। वरना वे आपका पतन आपके ही हाथों करा देंगे।

प्रस्तुति








 

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