सादगी की ताक़त - प्रमिला त्रिवेदी
सादगी की ताक़त
शहर के बीचों-बीच एक बड़ा-सा मकान था। ऊँची दीवारें, चमकदार गाड़ियाँ और हर कमरे में महँगी सजावट। उस घर में रहने वाली नंदिनी भी हमेशा सलीके से रहती थी, लेकिन उसे दिखावे का कोई शौक नहीं था।
वह कहती थी, “इंसान की पहचान उसके कपड़ों और सामान से नहीं, उसके व्यवहार से होती है।”
नंदिनी की सहेली रिया को उसकी यही सादगी कभी-कभी खटकती थी। रिया हर बात में फैशन, ब्रांड और लोगों की नजरों को महत्व देती थी।
एक दिन शहर में एक बड़ा सामाजिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। वहाँ शहर के प्रतिष्ठित लोग आने वाले थे। रिया ने नंदिनी से कहा, “तुम भी कुछ महँगा पहन लेना। आखिर बड़े लोगों के बीच जाना है।”
नंदिनी मुस्कुराई, “मैं वही पहनूँगी जिसमें मैं सहज रहूँ। किसी को प्रभावित करने के लिए खुद को बदलना मुझे नहीं आता।”
कार्यक्रम शुरू हुआ। चारों ओर चमक-दमक थी। लोग एक-दूसरे से मिलने के बजाय एक-दूसरे के कपड़े और हैसियत देख रहे थे।
उसी समय कार्यक्रम के बाहर एक बुज़ुर्ग महिला घबराई हुई खड़ी दिखाई दी। उनके हाथ में कुछ कागज़ थे और आँखों में चिंता।
नंदिनी तुरंत उनके पास पहुँची। “माँजी, आप परेशान लग रही हैं। क्या हुआ?”
बुज़ुर्ग महिला ने बताया कि उनके बेटे का अस्पताल में इलाज चल रहा है और सहायता के लिए उन्हें एक अधिकारी से मिलना है, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कहाँ जाएँ।
नंदिनी उन्हें अंदर ले गई। उसने धैर्य से उनकी बात सुनी, सही व्यक्ति तक पहुँचाया और आवश्यक कागज़ जमा करवाने में उनकी मदद की।
कुछ देर बाद बुज़ुर्ग महिला की आँखों में आँसू थे।
उन्होंने नंदिनी का हाथ पकड़कर कहा, “बेटी, आज यहाँ बहुत बड़े-बड़े लोग आए हैं, लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ा इंसान तुम निकली।”
नंदिनी बस मुस्कुरा दी।
पास खड़ी रिया सब देख रही थी। उसने धीरे से पूछा, “नंदिनी, तुम्हें कैसे पता था कि तुम्हें उनकी मदद करनी चाहिए?”
नंदिनी ने सहजता से कहा, “पता नहीं रिया… बस इतना जानती हूँ कि किसी की परेशानी देखकर अगर हम मदद कर सकते हैं, तो फिर देर नहीं करनी चाहिए।”
रिया कुछ देर चुप रही।
उस दिन पहली बार उसे समझ आया कि सादगी का अर्थ साधारण होना नहीं है। सादगी का अर्थ है—दिल में जगह इतनी बड़ी रखना कि उसमें दूसरों के लिए भी जगह बची रहे।
कुछ दिनों बाद रिया ने अपने जन्मदिन पर एक बड़ा आयोजन करने की जगह शहर के एक वृद्धाश्रम में जाकर बुज़ुर्गों के साथ समय बिताया।
नंदिनी ने पूछा, “आज इतनी सादगी?”
रिया मुस्कुराई और बोली, “हाँ… क्योंकि अब समझ गई हूँ कि दिखावे से तालियाँ मिल सकती हैं, लेकिन सादगी से दिल जीते जाते हैं।”
नंदिनी ने उसका हाथ थाम लिया।
दोनों की आँखों में एक ही भाव था—
सच्ची सुंदरता चेहरे पर नहीं, व्यवहार में होती है।
और सादगी… वह ताक़त है, जो बिना शोर किए दिलों पर अपना असर छोड़ जाती है।
रचनाकार
प्रस्तुति










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